आखिर कैसे मिलाई जाती है वर वधु की कुंडली जाने इस बारे में

अक्सर हिन्दू धर्म में विवाह से पूर्व वर और वधु की कुंडली का मिलान किया जाता है। क्योंकि माना जाता है की शादी से पूर्व कुंडली मिलान करने से दोनों में विवाह के बाद सामंजस्य बना रहता है। कुंडली मिलान के दौरान वर और वधु के गुणों और ग्रहों को मिलाया जाता है।

क्या होता है मांगलिक योग :

उत्तर भारतीय पद्धति के मुताबिक, 1, 4, 7, 8 तथा 12 वे भाव में मंगल ग्रह की उपस्थिति व्यक्ति को मांगलिक बताती है। जबकि दूसरी और दक्षिणी भारतीय पद्धति के अनुसार 1, 2, 4, 7, 8 तथा 12वें भाव में मंगल की उपस्थिति व्यक्ति को मांगलिक बनती है।

कैसे किया जाता है गुण मिलान :

इस प्रक्रिया में वर और वधु की कुंडलियों में से आठ तरह के गुणों अथवा अष्टकूट का मिलान किया जाता है। अष्टकूट मिलान में सभी आठों गुणों को उनके महत्व के आधार पर अंक प्रदान किए गए है।

वर्ण मिलान, वश्य मिलान, तारा मिलान, योनि मिलान, गृह मैत्री, गण मिलान, भकूट मिलान और नाड़ी मिलान होता है। इस मिलान के कुल 36 अंक होते है। अच्छे और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कम से कम 18 गुणों का मिलना अनिवार्य माना जाता है। गुण मिलान के जितने आंख बढ़ते है, दाम्प्त्य जीवन उतना ही सुखी माना जाता है।

कैसे करें कुंडली मिलान:

शादी से पूर्व वर और वधु का कुंडली मिलान करने के लिए वर और वधु का नाम, उनकी जन्मतिथि, उनका जन्मस्थान और जन्म समय की आवश्यकता होती है। वैसे तो इन सभी चीजों को ले जाकर पंडित जी के पास कुंडली मिलान करवा सकते है। अगर आपके पास बहुत अधिक समय नहीं है तो आप ऑनलाइन भी कुंडली मिलान कर सकते है।

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