कारगिल युद्ध का यह हीरो आज लोगों के जूठे बर्तन धोने को मजबूर है, ढेर किए थे 7 पाकिस्तानी

साल 1999 में कश्मीर के कारगिल जिले में भारत पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष हुआ जिसे हम कारगिल युद्ध के नाम से जानते हैं यह युद्ध इसलिए लड़ा गया क्योंकि पाकिस्तान की सेना ने कश्मीरी आतंकवादियों के साथ मिलकर भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया और जल्द ही पाकिस्तान के कब्जे वाली जगहों पर भारत का झंडा फहरा दिया भारत की विजय के साथ 26 जुलाई को यह युद्ध समाप्त हुआ।
इस भीषण युद्ध में हमने अपने कई जवान खोए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस युद्ध में हमारे 527 जवान शहीद हुए और करीब 1300 से ज्यादा योद्धा घायल हुए थे कारगिल के उन घायल योद्धाओं में से एक नाम लांस नायक सतवीर सिंह का भी था।
कारगिल युद्ध को हुए 19 साल हो गए तब से लेकर अब तक इस सुरवीर जवान के पैर में पाकिस्तान की एक गोली फंसी हुई है जिसकी वजह से वो अच्छे से चल नहीं सकते ऐसे में बैसाखी ही उनका सहारा है जिसने अपने जिस्म पर देश के लिए लड़ते हुए गोलियां खाई उसे आज पूछने वाला कोई नहीं है अपने घर का जीवन यापन करने के लिए उनके पास पर्याप्त जीविका के साधन नहीं हैं वह अपने परिवार का खर्च एक छोटी सी जूस की दूकान से चला रहे हैं।
दिल्ली के रहने वाले सतवीर सिंह कारगिल युद्ध के वक्त राजपुताना राइफल्स में लांसनायक के पद पर तैनात थे तोलोलिंग की लड़ाई में सतवीर सिंह अपना शौर्य और पराक्रम दिखाते हुए बुरी तरह घायल हो गए थे कारगिल की तोलोलिंग पहाड़ी पर सतवीर 9 सैनिकों की टुकड़ी की अगुवाई कर रहे थे उस लड़ाई का जिक्र करते हुए सतवीर बताते हैं।
वह 13 जून 1999 की सुबह थी कारगिल की तोलोलिंग पहाड़ी पर थे तभी घात लगाए पाकिस्तानी सैनिकों की टुकड़ी से आमना सामना हो गया पाकिस्तानी सैनिक 15 मीटर की दूरी पर थे हमें कवरिंग फायर मिल रहा था लेकिन 7 जवान हमारे भी शहीद हुए थे उसी दरम्यान कई गोलियां लगीं उनमें एक पैर की एड़ी में आज भी फंसी हुई है 17 घंटे वहीं पहाड़ी पर घायल पड़े रहे सारा खून बह चुका था 3 बार हेलीकॉप्टर भी हमें लेने आए लेकिन पाक सैनिकों की फायरिंग की वजह से नहीं उतर पाया हमारे सैनिक ही हमें ले गए एयरबस से श्रीनगर लाए 9 दिन बाद वहां रहने के बाद दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया घायल होने पर इलाज दिल्ली सेना के बेस अस्पताल में करीब एक साल तक चला।
उस युद्ध में शहीद हुए अफसरों सैनिकों की विधवाओं घायल हुए जवानों के लिए तत्कालीन सरकार में खेती की जमीन और पेट्रोल पंप मुहैया करवाने का ऐलान किया गया सतवीर सिंह को पेट्रोल पंप अलॉट तो हो गया लेकिन वो उन्हें कभी मिला ही नहीं उन्हें गुजर बसर के लिए 5 बीघा जमीन जरूर दी गई लेकिन बाद में वो भी उनसे छीन ली गई अपनी आप बीती बताते हुए सतवीर सिंह ने कहा कि जो जमीन उन्हें दी गई थी उसमें उन्होंने फलों का बाग लगाया था तीन साल तक सब ठीक चल रहा था तभी एक बड़ी पार्टी के नेता ने उनसे संपर्क किया उस नेता ने सतवीर सिंह के सामने एक पेशकश रखी कि जो पेट्रोल पंप उनको अलॉट हुआ है उसे वे उस नेता के नाम कर दें सतवीर सिंह ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया इसके बाद अपने रौब के बलबूते पर उस नेता ने सतवीर सिंह से उसका सब कुछ छीन लिया बड़ी तकलीफ होती है ये कहते हुए पाकिस्तान को धूल चटाने वाला यह जांबाज जवान भ्रष्टाचारी सिस्टम के आगे हार गया।

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