कोरोना में नौकरी चले जाने बाद 2 दोस्तों ने शुरू किया टिफिन बिजनेस, आज 3 रेस्टोरेंट के मालिक हैं

जॉब चले जाने का गम वो ही जान सकता है जिसने कभी जॉब की हो। नौकरी की अहमियत क्या होती है ये उसे ही पता होगा जिसने कभी पैर घिसे हों उस नौकरी को पाने के लिए। पर ठहरना मना है। यूपी के अयोध्या के दो दोस्त। सुल्तान और रोहित। एक हिंदू, दूजा मुस्लिम… पर उससे पहले दोनों अच्छे दोस्त। दोनों ही एक टेलीकॉम कंपनी में काम करते थे। पर नौकरी चली गई। मैनेजर लेवल का काम था। नौकरी गई है ठहर तो सकते नहीं। करना तो कुछ होगा ना। नौकरी जाने के बाद फिर उन्होंने शुरू किया टिफिन बिजनेस। आज दोनों तीन रेस्टोरेंट के मालिक हैं।

जॉब चले जाने के बाद दोनों ने कुछ अपना काम करने के बारे में सोचा। अगस्त 2018 में उन्होंने अपनी टिफिन सर्विस शुरू की। इस सर्विस का नाम उन्होंने रखा ‘घर जैसा’, सुल्तान बताते हैं कि शुरुआत काफी मुश्किल थी। लोगों से मिलकर उन्हें बहुत समझाना पड़ता था। फिर जाकर कहीं ऑर्डर मिलते थे। पूरी सेविंग्स इस बिजनेस में लगा दी थी। रेस्पॉन्स ज्यादा अच्छा नहीं था। यहां तक कि उन्हें लोन भी लेना पड़ा। दोस्तों से भी मदद ली

टिफिन सर्विस धीरे-धीरे चलने लगी। लोगों को खाना पसंद आया। इसके बाद ‘घर जैसा’ नाम से ही उन्होंने अपना पहला रेस्टोरेंट खोला। ये फैजाबाद के नाका रोड पर सिर्फ 80 वर्गफीट की एक दुकान में था। ये इलाका ट्रांसपोर्ट के लिए जाना जाता है। यहां ट्रक खड़े रहते थे। अपनी पहचान बनाने में उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। सुल्तान कहते हैं, ‘हम आए थे सर्विस इंडस्ट्री से। हम ये जानते थे कि अगर बेहतर सर्विस दी जाए तो बिजनेस को बढ़ाया जा सकता है। इसलिए हमने पूरा जोर सर्विस और ब्रांडिंग पर दिया।’ उन्होंने सोशल मीडिया का काफी सहारा लिया।

यहां तक कि अलग-अलग राज्यों की रेसिपी भी उन्होंने यूट्यूब से ही सीखी। जैसे-जैसे लोगों को इसका स्वाद पसंद आने लगा रेस्टोरेंट की तरक्की होने लगी। रोहित ने बताया कि इस रेस्त्रां में करीब 35 लोग काम करते हैं। कई ऐसे हैं जो पुरानी कंपनी में काम करते थे। बाद में उनकी भी जॉब चली गई, वे बी बेरोजगार हो गए थे। उन्हें भी दोनों दोस्तों ने काम करने का मौका दिया।

हालांकि बाद में लॉकडाउन लग गया। कुछ दिनों तो हालत काफी बिगड़ी रही। लेकिन अनलॉक होने के बाद लाइफ फिर से पटरी पर आ रही है। अब दोनों दोस्त अपने बिजनेस को अयोध्या से फैलाने की सोच रहे हैं। वो फ्रेंचाइजी मॉडल पर जाकर और रेस्त्रां खोलना चाहते हैं। उनका मानना है कि वो अपनी कामयाबी को दूसरे के साथ बांटना चाहते हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना चाहते हैं। सुल्तान और रोहित की कहानी बताती है कि जॉब चाहे चली जाए पर मेहनत कहीं गुम नहीं होनी चाहिए। उल्टा उसमें इजाफा होना चाहिए


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