चीन को ईंट का जवाब पत्थर से दे रहा भारत, लद्दाख में राफेल और मिराज भर रहा है उड़ान

भारत और चीन के बीच सरहद पर पिछले पांच महीने से तनाव जारी है। भारत चीन की हर नापक हरकत का माकूल जवाब दे रहा है। इससे चीन बैखला गया है। चीन के साथ बॉर्डर पर जारी विवाद के बीच आखिरकार राफेल जेट लद्दाख पहुंच गए हैं। जानकारी के मुताबिक चीन के साथ सैन्य स्तर की होनेवाली बातचीत से पहले इंडियन एयरफोर्स ने लद्दाख में राफेल जेट उड़ाए।  रविवार की देर शाम अंबाला एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमानों ने लद्दाख के लिए उड़ान भरी और हालात का जायजा लिया।

समाचार एजेंसी के मुताबिक, सोमवार को भी राफेल लड़ाकू विमान लद्दाख और लेह के आसमान में उड़ान भरते दिख सकते हैं। सीमा पर जारी तनाव के बीच भारतीय सेना अलर्ट पर है, साथ ही वायुसेना भी लगातार चीन पर नजरें बनाए हुए हैं। ऐसे में वायुसेना के मिग-29, तेजस पहले से ही चीनी सीमा के पास उड़ान भरते हुए दिखे हैं। लेकिन इस बार वायुसेना ने राफेल लड़ाकू विमान को भी मैदान में उतार दिया है, जो चीन को चेतावनी देने जैसा है। यानी औपचारिक रूप से वायुसेना में शामिल होने के दस दिन के भीतर ही राफेल लड़ाकू विमान सीमा पर दुश्मन को चेताने लगा है. राफेल विमान दस सितंबर को वायुसेना में शामिल हुआ था।

वहीं सीमा पर तनाव को कम करने के लिए आज फिर भारत और चीन के बीच कमांडर-स्तर की बातचीत होगी। भारत की तरफ से प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह के 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह कर सकते हैं वहीं चीन की तरफ से वार्ता में मेजर जनरल लिउ लिन शामिल होंगे। भारत इस वार्ता में चीन पर तुरंत फिंगर पॉइंट से हटने का दबाव डाल सकता है। दोनों देशों के बीच 29-31अगस्त की घटनाओं और 7 व 9 सितंबर को हुई गोलीबारी की वारदातों के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर यह पहली उच्च स्तरीय बैठक हो रही है।

जानकारी के मुताबिक भारत-चीन के बीच होने वाली इस कमांडर स्तर की वार्ता से पहले शनिवार को भारतीय सेना की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत आला अधिकारी शामिल हुए थे। इस बैठक में भारत की तरफ से चीन के सामने कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे ये तय किया गया था।

भारत और चीन के बीच काफी समय से सीमा विवाद जारी है। दोनों देश LAC पर तनाव कम करने को लेकर बातचीत कर रहे हैं लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया है। तनाव कम करने के लिए इस तरह की ये छठी बातचीत है। खास बात यह है कि इसमें विदेश मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होगा। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की यह वार्ता चीन वाले हिस्से मोल्दो में होगी।

आपको बता दें कि SCO समिट के दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्री एस जयशंकर और वांग यी ने आश्वासन दिया था कि डिसइंगेजमेंट को लेकर वे गंभीर हैं। उन्होंने वादा किया था कि पूर्व के समझौतों का सम्मान किया जाएगा। अब तक चीन और भारत के बीच की बातचीत बेनतीजा साबित हुई हैं। चीन कहता कुछ और है और कहता कुछ और है। शांति और अपनी सीमा में रहने का आश्वासन देने के बाद भी वह विस्तारवादी नीति से बाज नहीं आ रहा है

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