हाथरस केस में बड़ा खुलासा: पीड़िता के भाई के फोन से आरोपी के बीच 100 से ज्‍यादा बार हुई बात

 

हाथरस कांड में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान अब आरोपी और पीड़िता के भाई की कॉल डिटेल से चौंकाने वाली बात सामने आई है। हाथरस मामले की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने दावा किया है कि कॉल रिकॉर्ड में इस बात के सबूत देखने को मिली हैं कि मुख्य आरोपी और पीड़ित परिवार का कोई सदस्य लगातार एक-दूसरे के संपर्क में था।

जानकारी के अनुसार, आरोपी संदीप और पीड़िता के भाई के नंबरों से लगातार आपस में बात हो रही थी। कॉल रिकॉर्ड के अनुसार दोनों नंबरों से अक्टूबर-2019 से मार्च-2020 तक लगातार बात हुई थी। दोनों नंबरों से 100 से ज्यादा बार कॉल की गई। अक्टूबर 2019 और मार्च 2020 के बीच दो नंबरों के बीच पांच घंटे से अधिक की बातचीत हुई है। कॉल कुछ मिनटों तक चली हैं। पुलिस अब पीड़ित के भाई से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया लेने की योजना बना रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि एसआईटी द्वारा एक जांच अभी भी चल रही थी और उनके लिए इस मुद्दे पर टिप्पणी करना संभव नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि पुलिस सीडीआर के आधार पर जल्द ही जांच करेगी। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा था कि गिरफ्तार किए गए लोग पीड़ित के परिवार के संपर्क में रहते थे।

लोकेशन ट्रेस करने में जुटीं टीम

पुलिस मिलान कर रही है कि वारदात वाले दिन आरोपियों और पीडि़तों के परिजनों की लोकेशन कहां-कहां थी। आरोपी के परिजन लगातार कह रहे हैं कि घटना के वक्त वे वहां मौजूद नहीं थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जब पीड़ित पक्ष और आरोपी के बीच इतनी घनिष्ठता थी तो घटना के पीछे का कारण क्या है।

यूपी सरकार ने किया था साजिश का दावा

यूपी सरकार ने दावा किया कि इस क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगों को अंजाम देकर दुनिया में पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की छवि को धूमिल करने के लिए जस्टिस फॉर हाथरस नेम वेबसाइट की स्थापना की गई थी। फर्जी आईडी के जरिए हजारों लोग वेबसाइट से जुड़े थे। विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर, वेबसाइट ने देश और क्षेत्र में दंगे भड़काने और दंगों से बचने के तरीकों की रूपरेखा तैयार की। सहायता के बहाने धन उपलब्ध कराया गया।

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