NEET : शोएब आफताब ने सौ फीसदी अंकों के साथ किया टॉप

 

नई दिल्ली। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में ग्रेजुएट और पोस्‍ट ग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिले के लिए आयोजित ऑल इंडिया एलिजिबिलिटी एग्‍जाम (नीट 2020) का परिणाम आज जारी किया गया जिसमें शोएब आफताब ने 720 में से 720 अंक लाकर टॉप किया है।

नीट का परिणाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया गया है। रिजल्ट के साथ एनटीए ने फाइनल प्रश्नोत्तर भी जारी कर दिया है। इस परीक्षा में शोएब आफताब ने 720 में से 720 अंक लाकर टॉप किया है। शोएब ने इसके अलावा ओडीशा में पहली बार नीट टॉपर बनकर शोएब ने इतिहास रचा है। 100 प्रत‍िशत अंक पाने वाले शोएब के पर‍िजन अपने बेटे की मेहनत और जज्बे से बहुत खुश हैं।

इस परीक्षा के लिए कुल 15.97 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इनमें से 85 फीसदी से 90 फीसदी परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिया था। इस साल करीब 14.37 लाख से अधिक उम्मीदवार कोरोना महामारी के बावजूद 13 सितंबर प्रवेश परीक्षा में शामिल हिए थे।

कैंटोनमेंट जोन में होने के चलते जो छात्र परीक्षा नहीं दे पाए थे उनके लिए 14 अक्टूबर को फिर से परीक्षा का आयोजन किय गया था इसलिए रिजल्ट में थोड़ी देरी हो गई। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों को देश के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में संचालित एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेज में एडमिशन मिलेगा।केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने छात्रों को दी बधाई दी और कहा है कि विद्यार्थियों के करियर की प्रगति एवं बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए इन परीक्षाओं का आयोजन बेहद जरूरी था।

वैश्विक आपदा कोविड-19 के कारण संपूर्ण विश्व का शैक्षिक एवं अकादमिक जगत व्यापक रूप से प्रभावित हो रहा था और वर्तमान हालात में शीघ्र ही हमें इस बीमारी से निजात मिलती हुई भी दिखाई नहीं दे रही थी। ऐसे में छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए इन परीक्षाओं का आयोजन करवाना जरुरी था। वैसे कठिन परिसिथिति में नीट का आयोजन करवाना कठिन चुनौती भरा काम था।

केंद्रीय मंत्री ने एनटीए को परीक्षा के बेहतर संचालन को लेकर बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि सभी लोगों के कठिन परिश्रम के चलते परीक्षा का सफल आयोजन और समय पर रिजल्ट जारी हो पाया है। उन्होंने साफ कहा है कि कोविड महामारी के चलते देशभर में परीक्षा के आयोजन को लेकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई थी लेकिन बेहतर संकल्प और इच्छाशक्ति के चलते न केवल छात्रों का एक साल बच गया है बल्कि देश-विदेश में कही भी अध्ययन में छात्रों को बाधा नहीं उत्पन्न होगी।

उन्होने कहा है सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी परीक्षा के संचालन में प्रशासनिक मदद की और विपरित परिस्थितियों में सहयोग किया। वही देशभर में लॉकडाउन का पालन करते हुए इस परीक्षा का आयोजन करवाना किसी चुनौती से कम नहीं था। इन परीक्षाओं का आयोजन से जहां छात्रों का एक साल बर्बाद होने से बच गया वही छात्रों की योग्यता, विश्वसनीयता, छात्रवृत्ति, पुरस्कार, प्लेसमेंट तथा विश्व के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश की स्वीकार्यता और बेहतर भविष्य-निर्माण की संभावनाओं अब कोई बाधा नहीं आएगी।

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